बुधवार, फ़रवरी 25, 2009

जागते रहो देखनेवालो !

आनंद प्रधान
टेलीविजन समाचार चैनलों के संगठन-न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसियेशन (एनबीए) ने चैनलों की विस्तृत प्रसारण आचार संहिता और दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इन दिशानिर्देशों के मुताबिक अब समाचार चैनल अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, भूत,-प्रेत परालौकिक और झाड़- फंूक को महिमामंडित करनेवाले या उनमें लोगों का विश्वास बढ़ानेवाले कार्यक्रमों का प्रसारण नहीं करेंगे। एनबीए के दिशानिर्देशों के अनुसार समाचार चैनलों की रिपोर्टिंग में लोकहित को सर्वोपरि महत्त्व दिया जाएगा और कोई भी रिपोर्ट संदर्भ से काटकर नहीं दिखायी जाएगी। रिपोर्टिंग में वस्तुनिष्ठता और तथ्यों की शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाएगा। समाचारों को पर्याप्त जांच-पड़ताल और दो या उससे अधिक सूत्रों से पुष्टि के बाद ही प्रसारित किया जाएगा।
एनबीए ने समाचार चैनलों से यह भी कहा है कि स्टिंग आपरेशन आखिरी उपाय के बतौर और वह भी लोकहित में किया जाना चाहिए। यही नहीं, स्टिंग आपरेशन करते हुए यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वह किसी अपराध या अनियमितता के सबूत जुटाने के लिए हो न कि खुद अपराध या अनियमितता में शामिल हो जाए। इन दिशानिर्देशों में समाचार चैनलों को अपराध और हिंसा के महिमामंडन से बचने और मीडिया ट्रायल से दूर रहने की सलाह दी गयी है। वे सभी जागरूक पाठक जो समाचार चैनलों की रिपोर्टों ओर कार्यक्रमों में दिलचस्पी रखते हैं या चैनलों के कवरेज में आई गिरावट को लेकर चिंतित रहते हैं, उन्हें इन दिशानिर्देशों को जरूर पढ़ना चाहिए। इसके लिए उन्हें एनबीए की वेबसाइट पर जाना होगा जहां समाचार चैनलों के कार्यक्रमों और रिपोर्टो को लेकर शिकायत करने की प्रक्रिया का ब्यौरा भी दिया गया है।
निश्चय ही, सभी जागरूक दर्शकों को अपने अधिकारों का अवश्य ही इस्तेमाल करना चाहिए। आप मानें या न मानें लेकिन समाचार चैनलों की अन्तर्वस्तु (कंटेंट)में आई गिरावट के लिए कुछ हद तक वे निष्क्रिय दर्शक भी जिम्मेदार हैं जो अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत के साथ-साथ अनुचित, अनैतिक और मनगढंत रिपोर्टों और कार्यक्रमों को चुपचाप बर्दाश्त करते रहते हैं। लेकिन याद रखिए कि समाचार चैनलों पर दिखाए जानेवाले कंटेंट से आपकी, हमारी और सबकी जिंदगी प्रभावित होती है। अगर समाचार चैनल भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, अंधविश्वास और सतही तथा छिछोरे कार्यक्रम और रिपोर्टें दिखाने में ज्यादा समय खर्च कर रहे हैं तो इसका अर्थ है कि वे हमारी और आपकी जिंदगी को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित करनेवाली खबरें और रिपोर्ट नहीं दिखाएंगे या उन्हें कम समय और महत्त्व देंगे या तोड़मरोड़कर दिखाएंगे।
उस स्थिति में हम सबके जीवन को प्रभावित करनेवाले मुद्दे, समस्याएं और सवाल सार्वजनिक एजंडे पर नहीं आ पाते हैं और हम परोक्ष रूप से उसकी भारी कीमत चुकाते हैं। इसलिए अब सभी देखनेवालों, पढ़नेवालों और सुननेवालों के जागने और अपनी बात सुनाने का समय आ गया है। यह कोई खास मुश्किल काम नहीं है। इसके लिए आपको सिर्फ समाचार चैनल देखते हुए अपनी आंखें, कान और दिमाग खोलकर रखना है। चैनल देखते हुए जब भी ऐसा लगे कि यह एनबीए के दिशानिर्देशों या उसकी भावना के खिलाफ है, आप तत्काल एक शिकायत उस चैनल के शिकायत निपटारा अधिकारी को लिख भेजिए। एनबीए के दिशानिर्देशों के अनुसार हर समाचार चैनल ने अपने बेवसाइट पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और शिकायत अधिकारी का ब्यौरा दिया है। यही नहीं, अगर आप शिकायत अधिकारी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं तो एनबीए में न्यायमूर्ति (रिटायर्ड) जे एस वर्मा की अध्यक्षता वाले शिकायत निपटारा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर चैनलों की खबर ले सकते हैं।
देर किस बात की है, उठाइए कलम और लिख भेजिए अपनी शिकायत। चैनलों को रास्ते पर ले आने का अब यही रास्ता बचा है।

1 टिप्पणी:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

आशा करनी चाहिए कि सभी चैनल इन दिशा निर्देशों का ईमानदारी से पालन करेंगे.